URAJ DIXIT SEVA SAHAYTA SHRAM
poor man helps
Wednesday, 25 February 2015
वीरांगनियाँ
निहारती ताकती मुझे दुनियाँ की रंगीनियाँ कोई आस है उन्हे शायद मुझ पर छा जाने की मगर मेरे दिल में तो बसी हैं इस हिंद की वीरांगनियाँ।। डॉ. सोनल
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