है
नफरतों
का जोर
मुहोब्बतों में
क्युँ
है
नफरतें
हावी
मुहोब्बतों
पर
क्युँ
ये
सवाल
रोज
मुझसे
करती हैं
मेरी
धड़कनें,
कब
होगीं
दिलों में
सिर्फ
और
सिर्फ
मुहोब्बतें।।
डॉ. सोनल
Saturday, 28 February 2015
Wednesday, 25 February 2015
जहाँन की खुशियाँ
खोजती
मुझे
फिर
रहीं
इस
जहाँन
की खुशियाँ,
मैंने
खुद को
छिपा
लिया
उनसे
अच्छी
लगती हैं
मुझकों
रंज
गमियाँ।।
डॉ. सोनल
वीरांगनियाँ
निहारती
ताकती
मुझे
दुनियाँ की
रंगीनियाँ
कोई
आस है
उन्हे
शायद
मुझ पर
छा जाने की
मगर
मेरे
दिल में
तो बसी हैं
इस
हिंद की
वीरांगनियाँ।।
डॉ. सोनल
Subscribe to:
Comments (Atom)